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कानपुर से लंदन तक फैला फर्जी डिग्री रैकेट बेनकाब, हाईस्कूल से PhD तक के नकली प्रमाणपत्रों का करोड़ों का खेल

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कानपुर। फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के जरिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। कानपुर पुलिस और एसआईटी की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है, जो हाईस्कूल से लेकर पीएचडी तक की फर्जी डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार कर देशभर में सप्लाई कर रहा था। जांच में नेटवर्क के तार विदेश, खासकर लंदन तक जुड़े होने की बात सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक गिरोह मोटी रकम लेकर बिना परीक्षा दिलाए हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक, एलएलबी, फार्मेसी और पीएचडी तक के फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करता था। इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल नौकरी, प्रमोशन और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए किया जाता था।

मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी मनीष कुमार उर्फ रवि मूल रूप से राजस्थान का निवासी है और हैदराबाद से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि खुद को "डॉक्टर" बताने वाला आरोपी केवल 12वीं पास है और उसने फर्जी डॉक्टरेट की उपाधि के सहारे अपनी पहचान बनाई थी।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी "ग्लोबल बुक ऑफ एक्सीलेंस अवॉर्ड यूके लंदन" जैसे नामों से कार्यक्रम आयोजित कर लोगों के बीच विश्वसनीयता बनाने की कोशिश करता था। विभिन्न सम्मान समारोहों और आयोजनों के जरिए उसने देशभर में अपना संपर्क नेटवर्क तैयार किया और फर्जी डिग्री कारोबार को विस्तार दिया।

98 विश्वविद्यालयों तक फैले नेटवर्क की जांच

जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह का नेटवर्क दर्जनों शैक्षणिक संस्थानों और करीब 98 विश्वविद्यालयों तक फैला हुआ था। आरोपी टेलीकॉलिंग, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। कई मामलों में बैकडेट में दाखिला दिखाकर नकली शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार किए गए।

करोड़ों के लेनदेन पर पुलिस की नजर

पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में लाखों रुपये के लेनदेन सामने आए हैं, जबकि आशंका है कि पूरे नेटवर्क का कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। मामले में कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

बड़े नामों की भी जांच

जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की कई चर्चित व्यक्तियों, कथावाचकों और अन्य लोगों के साथ तस्वीरें मिली हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों का नेटवर्क से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या वे केवल आयोजनों में शामिल हुए थे।

फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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